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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की बीमारियो की à¤à¤• सूची
* पाचन तंतà¥à¤°
दांत निकलने की परेशानियॉं, मà¥à¤–पाक, उलà¥à¤Ÿà¤¿ व अमाशà¥à¤¯à¤¶à¥‹à¤¥, दसà¥à¤¤, पेचिश, पेट में दरà¥à¤¦, पीलिया, क़मि, मोतीà¤à¤°à¤¾, दोहद, कबà¥à¤œà¤¼ और दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ से ज़हर चला जाना।
* शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤°
जà¥à¤•ाम खॉंसी, टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤² या कंठशालूक का शोथ, गला खराब होना (गलदाह), वायà¥à¤µà¤¿à¤µà¤¿à¤° शोथ, शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤¿à¤•ा शोथ, निमोनिया, तपेदिक, क़मि परजीवी से होने वाली खॉंसी, दमा।
* तà¥à¤µà¤šà¤¾
छाले, संकà¥à¤°à¤®à¤£ वाले घाव, à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾, जूंà¤à¤‚, पामा (सà¥à¤•ैबीज़), ददà¥à¤°à¥ कृमि।
* आà¤à¤–े
दà¥à¤–ती आà¤à¤–, कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में अलà¥à¤¸à¤°, रतौंधी, देखने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल और कानापन।
* कान
बाहरी कान का संकà¥à¤°à¤®à¤£, बाहरी कान में फंफूद, कान में मोम जमना, मधà¥à¤¯à¤•रà¥à¤£ का संकà¥à¤°à¤®à¤£ और बहरापन।
* तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤°
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤•ावरण शोथ, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• शोथ, टिटेनस, पोलियो, मिरà¥à¤—ी और मानसिक रूप से अविकसित होना। दिल और संचरण: जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ गड़बड़ियॉं और वालà¥à¤µ की बीमारियॉं।
* कंकाल तंतà¥à¤°
पैरों के आकार में गड़बड़ी, अनà¥à¤¯ हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और जोड़ों के आकार में गड़बड़ियॉं, रिकेटस, हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का संकà¥à¤°à¤®à¤£, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ के कारण पेशियों का खतम हो जाना, पेशीविकृति।
* खून
दातà¥à¤° कोशिका अनीमिया, लोहे की कमी से अनीमिया, मलेरिया, कैंसर और रकà¥à¤¤ सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ संबंधित गड़बड़ियॉं।
* लसिका तंत
फाइलेरिया रोग, कैंसर, गले में गांठें और वायरस से होने वाली गांठें।
* हारमोन
मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ (डायबटीज़), घेंघा रोग और वृदà¥à¤§à¤¿ में अवरोध।
* मूतà¥à¤° तंतà¥à¤°
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ का शोथ (वृकà¥à¤• शोथ), अपवृकà¥à¤•ीय संलकà¥à¤·à¤£, मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ में संकà¥à¤°à¤®à¤£, मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— शोथ, पथरी और पेशाब रà¥à¤• जाना।
* पà¥à¤°à¥à¤· जनन तंतà¥à¤°
वृषण का पूरी तरह से नीचे न आना, वृषण का विकसित न होना और निरà¥à¤¦à¥à¤§à¤ªà¥à¤°à¤•ाश।
* महिला जनन अंग
कम विकसित डिंबगà¥à¤°à¤‚थि या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯à¥¤
* अनà¥à¤¯ बीमारियॉं
खसरा, रूबैला, छोटी माता, कनफेड़, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£, समय से पहले जनà¥à¤®, जनà¥à¤® के समय वजन कम होना।
* दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾à¤à¤‚
चोट, जलना, किसी कीड़े आदि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ काट लिया जाना, डूब जाना, बिजली का à¤à¤Ÿà¤•ा, कान या नाक में कोई बाहरी चीज़ का चला जाना या ज़हर अंदर चला जाना। यह सूची केवल à¤à¤• मोटी समठबनाने के लिठहै।बचपन में पाचन तंतà¥à¤°, शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° और तà¥à¤µà¤šà¤¾ की बीमारियॉं सबसे अधिक होती हैं। शरीर में कीड़े होने से à¤à¥€ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ बढ़ता है। बीमारी के लिठदवा दे देना ही काफी नहीं होता। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठऔर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मौत से बचाने के लिठहमें बीमारियों से बचाव और शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही इलाज पर à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¥¤ पोषण, सफाई और टीकाकरण बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होते हैं।
बचपन में होने वाला तपेदिक
शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° वाले अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ में आपको तपेदिक के बारे में और जानकारी मिलेगी। इसका à¤à¥€ जलà¥à¤¦à¥€ निदान किया जाना, चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ मदद हासिल करना और बाद में देखà¤à¤¾à¤² महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
* लकà¥à¤·à¤£
किसी बचà¥à¤šà¥‡ का वजन लगातार कम होता जाना (हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ महीनों के अंतराल में), या वजन न बढ़ना या उसका ठीक से खाना न खाना।
बचà¥à¤šà¥‡ का लगातार बीमार रहना ।
खॉंसी और छाती में से आवाज़ आना।
सामानà¥à¤¯ इलाज के बावजूद बà¥à¤–ार न जाना।
बचà¥à¤šà¥‡ का निमोनिया, काली खॉंसी या खसरे से न उबर पाना।
लसिका गà¥à¤°à¤‚थियों में दरà¥à¤¦ रहित सूजन।
आà¤à¤–ों का चिरकारी रूप से लाल रहना (अजलीय नेतà¥à¤°à¤¶à¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ शोथ)
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• आवरण शोथ - गरà¥à¤¦à¤¨ अकड़ना, बà¥à¤–ार, वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में बदलाव।
कूलà¥à¤¹à¥‡ या पीठमें लगातार दरà¥à¤¦ रहना। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में तपेदिक होना à¤à¥€ उतना हीे आम है जितना कि बड़ों में।
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