बच्चों का साधारण रोग क्या है?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:34

बच्चों की बीमारियो की एक सूची

* पाचन तंत्र

दांत निकलने की परेशानियॉं, मुखपाक, उल्टि व अमाश्यशोथ, दस्त, पेचिश, पेट में दर्द, पीलिया, क़मि, मोतीझरा, दोहद, कब्ज़ और दुर्घटना से ज़हर चला जाना।

* श्वसन तंत्र

जुकाम खॉंसी, टॉन्सिल या कंठशालूक का शोथ, गला खराब होना (गलदाह), वायुविविर शोथ, श्वसनिका शोथ, निमोनिया, तपेदिक, क़मि परजीवी से होने वाली खॉंसी, दमा।

* त्वचा

छाले, संक्रमण वाले घाव, एक्ज़ीमा, जूंएं, पामा (स्कैबीज़), दद्रु कृमि।

* आँखे

दुखती आँख, कोर्निया में अल्सर, रतौंधी, देखने में मुश्किल और कानापन।

* कान

बाहरी कान का संक्रमण, बाहरी कान में फंफूद, कान में मोम जमना, मध्यकर्ण का संक्रमण और बहरापन।

* तंत्रिका तंत्र

मस्तिष्कावरण शोथ, मस्तिष्क शोथ, टिटेनस, पोलियो, मिर्गी और मानसिक रूप से अविकसित होना। दिल और संचरण: जन्मजात गड़बड़ियॉं और वाल्व की बीमारियॉं।

* कंकाल तंत्र

पैरों के आकार में गड़बड़ी, अन्य हड्डियों और जोड़ों के आकार में गड़बड़ियॉं, रिकेटस, हड्डियों का संक्रमण, कुपोषण के कारण पेशियों का खतम हो जाना, पेशीविकृति।

* खून

दात्र कोशिका अनीमिया, लोहे की कमी से अनीमिया, मलेरिया, कैंसर और रक्त स्त्राव संबंधित गड़बड़ियॉं।

* लसिका तंत

फाइलेरिया रोग, कैंसर, गले में गांठें और वायरस से होने वाली गांठें।

* हारमोन

मधुमेह (डायबटीज़), घेंघा रोग और वृद्धि में अवरोध।

* मूत्र तंत्र

गुर्दे का शोथ (वृक्क शोथ), अपवृक्कीय संलक्षण, मूत्राशय में संक्रमण, मूत्रमार्ग शोथ, पथरी और पेशाब रुक जाना।

* पुरुष जनन तंत्र

वृषण का पूरी तरह से नीचे न आना, वृषण का विकसित न होना और निरुद्धप्रकाश।

* महिला जनन अंग

कम विकसित डिंबग्रंथि या गर्भाशय।

* अन्य बीमारियॉं

खसरा, रूबैला, छोटी माता, कनफेड़, कुपोषण, समय से पहले जन्म, जन्म के समय वजन कम होना।

* दुर्घटनाएं

चोट, जलना, किसी कीड़े आदि द्वारा काट लिया जाना, डूब जाना, बिजली का झटका, कान या नाक में कोई बाहरी चीज़ का चला जाना या ज़हर अंदर चला जाना। यह सूची केवल एक मोटी समझ बनाने के लिए है।बचपन में पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र और त्वचा की बीमारियॉं सबसे अधिक होती हैं। शरीर में कीड़े होने से भी कुपोषण बढ़ता है। बीमारी के लिए दवा दे देना ही काफी नहीं होता। बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और उन्हें मौत से बचाने के लिए हमें बीमारियों से बचाव और शुरुआत में ही इलाज पर भी ध्यान देना चाहिए। पोषण, सफाई और टीकाकरण बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

बचपन में होने वाला तपेदिक

श्वसन तंत्र वाले अध्याय में आपको तपेदिक के बारे में और जानकारी मिलेगी। इसका भी जल्दी निदान किया जाना, चिकित्सीय मदद हासिल करना और बाद में देखभाल महत्वपूर्ण है।

* लक्षण

किसी बच्चे का वजन लगातार कम होता जाना (हफ्तों महीनों के अंतराल में), या वजन न बढ़ना या उसका ठीक से खाना न खाना।
बच्चे का लगातार बीमार रहना ।
खॉंसी और छाती में से आवाज़ आना।
सामान्य इलाज के बावजूद बुखार न जाना।
बच्चे का निमोनिया, काली खॉंसी या खसरे से न उबर पाना।
लसिका ग्रंथियों में दर्द रहित सूजन।
आँखों का चिरकारी रूप से लाल रहना (अजलीय नेत्रश्लेष्मा शोथ)
मस्तिष्क आवरण शोथ - गर्दन अकड़ना, बुखार, व्यवहार में बदलाव।
कूल्हे या पीठ में लगातार दर्द रहना। ध्यान रहे कि बच्चों में तपेदिक होना भी उतना हीे आम है जितना कि बड़ों में।

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